नवदुर्गा के 9 नाम , नवरात्रि का महत्त्व
आस्था और देवी आराधना का पर्व नवरात्रि ( Navratri ) के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. नव का अर्थ है नौ और रात्रि का अर्थ है रात। वैदिक कैलेंडर के अनुसार, चार प्रकार के नवरात्र चैत्र, शरद, माघ गुप्त और आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हैं। हालाँकि, दो प्रमुख नवरात्रि, चैत्र और शरद नवरात्रि हैं।
नवदुर्गा के 9 नाम व रूप है जिसमे में पहला रूप मां शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है, दूसरा ब्रह्मचारिणी, तीसरा चंद्रघंटा, चौथा कूष्मांडा, पांचवीं स्कंदमाता है औऱ देवी के छठे रूप को कात्यायनी, सातवें रूप को कालरात्रि, आठवां महागौरी और नौवें स्वरूप को सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है. मां दुर्गा के इन सभी नामों के पीछे पौराणिक कहानिया और किस्से जुड़े हुए है आइए जानते है।हम जानेगे मां नवदुर्गा के 9 नाम, नवरात्रि का महत्त्व और उनसे जुड़े कुछ पौराणिक किस्से और रहस्य के बारे मे।

नव दुर्गा की कहानी क्या है ?
यु तो कई प्रकार कहानी और तथ्य भरे पड़े है, संसार में पर दुर्गा मां की असली कहानी क्या है? यह जानना जरुरी है हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार महिसासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की तथा उन्हें प्रसन्न कर अमरता का वरदान प्राप्त कर लिया। किन्तु ब्रह्मा जी साथ ही शर्त राखी की महिसासुर का वध एक कन्या के द्वारा होगा किन्तु महिसासुर को लगा की कोई कन्या इतनी शक्तिशाली नहीं हो सकती की उसका वध कर सके।
अपनी शक्ति के घमंड में चूर महिसासुर ने सम्पूर्ण पृथ्वी, पातळ के साथ साथ स्वर्ग पर भी अत्याचार करना प्रारम्भ कर दिया था। महिषासुर ने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चंद्रमा, यम, वरुण और अन्य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। देवताओं को महिषासुर के प्रकोप से पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा है। तब सभी देवताओ ने भगवान ब्राह्म,विष्णु और शिव की आराधना की तब दिनों त्रिदेव ने समान शक्ति का आह्वान किया जिसके फलस्वरूप माँ दुर्गा का अवतरण हुआ महिसासुर का अंत करने के लिए सभी देवताओ ने माँ दुर्गा को अपने-अपने अस्त्र प्रदान किये।
माँ दुर्गा और महिसासुर का भीषण युद्ध 9 दिनों तक चला इसीलिए माँ दुर्गा को अंतत: महिसासुर का वध माँ दुर्गा के हाथो हुआ और वे महिषासुरमर्दिनी कहलाईं। नवदुर्गा के 9 नाम , नवरात्रि का महत्त्व पर विस्तृत जानकारी पौराणिक कथाओ में उपलब्ध है किन्तु सभी का यहाँ पर वर्णन करना संभव नहीं शब्दों की सीमा में रहकर माँ की महिमा का जितना अधिक गुणगान किया जा सके कोशिश की गई है।
नवरात्रि का महत्व क्या है ? या नवरात्र का महत्त्व क्या है ?
नवरात्रि आराधना और तप का उत्सव है मां दुर्गा की पूजा के लिए ये नौं दिन बहुत ही पावन और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मान्यता है कि इस समय मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। इन नौं दिनों तक भक्त मां दुर्गा के नौं स्वरुपों का पूजन करते हैं।
अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। यहां तक कि कुछ श्रद्धालु इन रात्रियों में पूरी रात माँ की आराधना में पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
नवरात्री के अवसर पर माँ शक्ति के 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए पहुँचता है, और जो श्रद्धालु इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते वे अपने घर या निवास पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं। कहा जाता है की नवरात्रि में मनुष्य माँ की उपासना करके न सिर्फ अपनी मनोकामनाये पूरी कर सकता अपितु मानसिक और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रह सकता है।
वैज्ञानिक आधार पर नवरात्रि का महत्त्व क्या है ? इसका सरल सा जबाबा है , शरीर को सुचारू चलने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं लेकिन अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए प्रत्येक 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता ह। जिसमें सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि होती है। साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से मन शुद्ध होता है, क्योंकि स्वच्छ मन मंदिर के सामान होता है जहाँ ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।
भारत में 52 शक्तिपीठ स्थित हैं। वहीं प्रसिद्ध और सबसे बड़ा शक्तिपीठ माता वैष्णो देवी धाम है। माता वैष्णो देवी के दरबार में साल भर भक्तों की भीड़ रहती है। किन्तु नवरात्री के पवन पर्व पर माता वैष्णव देवी की महत्ता बड़ी है,अगर आप भी माँ वैष्णव देवी के दर्शन करने की योजना बना रहे है तो यात्रा सम्बन्धी सारी जानकारी श्री माता वैष्णव देवी श्राइन बोर्ड की ऑफिसियल वेबसाइट से प्राप्त कर सकते है

नवदुर्गा के 9 नाम
नवरात्रि या नवदुर्गा के नौ दिनों मां दुर्गा के नौं स्वरुपों का पूजन करते हैं। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय मां ब्रह्मचारिणी, चतुर्थ मां चंद्रघंटा, पंचम स्कंद माता, षष्टम मां कात्यायनी, सप्तम मां कालरात्रि, अष्टम मां महागौरी, नवम मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। मां के हर स्वरुप की अपनी एक अलग महत्वता और निराली महिमा है। दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में निम्नलिखित श्लोक में नवदुर्गा के 9 नाम का वर्णन इस प्रकार है।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।
1.मां शैलपुत्री
नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है ये मां दुर्गा का प्रथम स्वरुप हैं। ये राजा हिमालय (शैल) की पुत्री हैं इसी कारण ये शैलपुत्री कहा जाता हैं। ये वृषभ पर विराजती हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तो बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। प्रथम दिन इनके पूजन से ही भक्त के नौं दिन की आराधना आरंभ करते है ।
मां शैलपुत्री के प्रभावी मंत्र
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ -या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

2.मां ब्रह्मचारिणी माता
मां दुर्गा के नौं स्वरुपों में से द्वितीय है मां ब्रह्मचारिणी ब्रह्मचारिणी अर्थात् तप का आचरण करने वाली। इन्होंने भगवान शिव को पति रुप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी इसीलिए ये माँ ब्रह्मचारिणी कहलाई। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप अत्यंत ज्योतिर्मय है। इनके बांए हाथ में कमंडल सुशोभित है तो दाहिने हाथ में ये माला धारण करती हैं। इनकी उपासना से साधक को सदाचार, संयम की प्राप्ति होती है।
माँ ब्रह्मचारिणी माता के प्रभावी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

3.माँ चंद्रघण्टा देवी
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजा की जाती है । ये मां दुर्गा की तृतीय शक्ति हैं। इनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्तियां समाहित हैं। इनके मस्तक पर अर्द्ध चंद्र सुशोभित हैं, इसी कारण ये चंद्रघंटा कहलाती हैं। इनके घंटे की ध्वनि से सभी नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं। इनके रंग स्वर्ण के समान चमकीला है, ये सिंह पर विराजती हैं। मां चंद्रघंटा का रूप भक्तों के लिए अत्यंत कल्याण कारी है।
माँ चंद्रघण्टा देवी के प्रभावी मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥ पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥ या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता

4. माँ कूष्मांडा माता
नवरात्रि के चतुर्थ दिन मां दुर्गा के चतुर्थ रूप कूष्मांडा माता की पूजा की जाती है। इनकी मंद हंसी से ही ब्रह्मांड का निर्माण होना बताया जाता है इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार जब चारों ओर अंधकार ही अंधकार था तब मां कूष्मांडा की ऊर्जा से ही सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन हुआ था। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, वे इनमें धनुष, बाण, कमल, अमृत, चक्र, गदा और कमण्डल धारण करती हैं। मां के आंठवे हाथ में माला सुशोभित रहती है। ये भक्त की भवसागर तारिणी है। और उसे लौकिक-परालौकिक अनुभूति प्रदान करती हैं।
माँ कूष्मांडा माता के प्रभावी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

5.माँ स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवें दिन पंचम स्वरुप में माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माता गोद में कुमार कार्तिकेय विराजमान है। और कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है, इसी कारण ये स्कंद माता कहलाती हैं। माँ कमल के आसन पर विराजती हैं और इनका वाहन सिंह है। इनका स्वरुप स्नेहमय और मन को मोह लेने वाला है। इनकी चार भुजाएं हैं, दो भुजाओं में कमल धारण किये हैं तो वहीं एक हाथ वर मुद्रा में रहता है। मां एक हाथ से अपनी गोद में स्कंद कुमार को लिए हुए हैं। स्कंद माता सदैव अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए तत्पर रहती हैं।
माँ स्कंदमाता के प्रभावी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

6.माँ कात्यायनी माता
नवरात्रि में छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरुप मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की जाती है। माता ने कात्यायन ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रुप में जन्म लिया था और ऋषि कात्यायन ने ही सर्वप्रथम इनका पूजन किया था। इसी कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी का स्वरुप तेजमय और अत्यंत चमकीला है। इनकी चार भुजाएं हैं, दाहिनी तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयु मुद्रा में रहता है तो वहीं नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है। बाई ओर के ऊपर वाले हाथ में मां तलवार धारण करती हैं तो वहीं नीचे वाले हाथ में कमल सुशोभित है। सिंह मां कात्यायनी का वाहन है। इनकी साधना से साथ को इस लोक में रहकर भी आलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।
माँ कात्यायनी के प्रभावी मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नम:॥ चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥ या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

7.माँ कालरात्रि माता
नवदुर्गा या नवरात्रि के सातवे दिन माँ कालरात्री की आराधना की जाती ह। नवरात्रि में सप्तमी पर अर्थात सातवे दिन इन्हीं की पूजा अर्चना की जाती है। इनका स्वरुप देखने में प्रचंड है, लेकिन ये अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं। इसलिए इन्हें शुभड्करी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार रक्तबीज नामक राक्षस का संहार करने के लिए मां ने ये भयानक रुप धारण किया था। इनकी पूजा करने से भक्त सभी तरह के भय से दूर हो जाता है। ये दुष्टों का विनाश करती हैं।
माँ कालरात्रि माता के प्रभावी मंत्र
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:

8.माँ महागौरी माता
नवरात्रि या नवदुर्गा के आठवे दिन माँ दुर्गे के अष्टम स्वरुप के रूप में महागौरी की पूजा की जाती है। दुर्गा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार इन्होंने भगवान शंकर को पति रुप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी जिसके कारण इनका शरीर काला पड़ गया था।
भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर इन्हें गौरवर्ण प्रदान किया इसलिए ये महागौरी कहलाईं। ये श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं इसलिए इन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं। दाहिनी और का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में रहता है तो वहीं नीचे वाले हाथ में मां त्रिशूल धारण करती हैं। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरु रहता है तो नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में रहता है। इनकी पूजा से पूर्वसंचित पापकर्म भी नष्ट हो जाते हैं। ये अत्यंत फलदायिनी हैं और भक्तों का कल्याण करती हैं।
माँ महागौरी माता के प्रभावी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

9.माँ सिद्धिदात्री माता
नवरात्रि में नवमी तिथि या अंतिम दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरुप मां सिद्धिदात्री की पूजन की जाती है ।माँ सिद्धिदात्री माता सिद्धियों को प्रदान करने वाली है । इनकी पूजा से भक्त को सिद्धियों की प्राप्ति होती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान शंकर को इन्हीं से सिद्धियों की प्राप्ति हुई थी और इन्हीं की अनुकंपा से भगवान शंकर का आधा शरीर देवी (नारी) का हुआ, जिसके बाद वे अर्द्ध नारीश्वर कहलाए। ये कमल के फूल पर विराजती हैं और सिंह इनका वाहन है। इनकी आराधना से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
माँ सिद्धिदात्री माता के प्रभावी मंत्र
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥ – या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम॥

नवदुर्गा यानी देवी दुर्गा के नौ स्वरूप। नवरात्रि में देवी दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों के लिए एक दिन निर्धारित है। नवदुर्गा के 9 नाम ,नवरात्रि का महत्त्व जानने से नवरात्रि में 9 देवियों के 9 मंत्र के जप से आप अपनी 9 तरह की मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। सेहत से लेकर धन, सुख, ऐश्वर्य तक की प्राप्ति होगी। साथ ही नवरात्रि में देवी को 9 दिन 9 तरह के भोग भी लगाने चाहिए। साथ ही नौ दिनों तक तन और मन से शुद्ध रहकर माँ की आराधना करे। नवरात्रि माँ के अलग अलग रूपों को निहारने और उत्सव मानाने का त्यौहार है।
सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न : नौ देवियों में सबसे बड़ी देवी कौन सी है?
उत्तर :नौ देवियो में सबसे बड़ी देवी माँ भगवती को माना जाता है |
प्रश्न :नवरात्रि के 9 दिन कौन कौन से रंग के कपड़े पहने?
उत्तर :लाल ,हरे और पिले रंग के कपडे पहन सकते है |
प्रश्न : दुर्गा माता के 9 रूप कौन कौन से हैं?
उत्तर : 1. शैलपुत्री, 2. ब्रह्मचारिणी, 3. चंद्रघंटा, 4. कूष्मांडा, 5. स्कंध माता, 6. कात्यायिनी, 7. कालरात्रि, 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री।
