यस बैंक के सदस्यों ने 22वीं सालाना आम बैठक में निदेशक मंडल द्वारा प्रस्तावित सभी प्रस्तावों को दी पूर्ण सहमति

मुंबई, 19 अगस्त, 2026: यस बैंक के सदस्यों ने बुधवार, 19 अगस्त, 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (“वीसी”)/ अन्य ऑडियो-विज़ुअल माध्यमों (“ओएवीएम”) के ज़रिए आयोजित बैंक की 22वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में भारी बहुमत से सभी सात प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। यह परिणाम रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हुई वोटिंग के बाद सामने आया। सदस्यों ने निम्नलिखित को मंज़ूरी दी:

1.सामान्य कामकाज मंज़ूर किया गया:

I. 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए बैंक के लेखा-परीक्षित एकल वित्तीय विवरण और उन पर निदेशक मंडल और लेखापरीक्षकों की रिपोर्ट

II. 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए बैंक के ऑडिट किए गए समेकित वित्तीय विवरण और उन पर लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (साधारण प्रस्ताव)

2.श्री शिवकुमार डेगा (डीआईएन: 00364444) की नियुक्ति को मंज़ूरी दी गई, जो रोटेशन के आधार पर सेवानिवृत्त हुए थे और पात्र होने के कारण दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश किया था। (साधारण प्रस्ताव)

3.मेसर्स एमएसकेए एंड एसोसिएट्स एलएलपी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (आईसीएआई फर्म रजिस्ट्रेशन नंबर 105047डब्ल्यू /डब्ल्यू101187) को जॉइंट स्टैच्युटरी ऑडिटर में से एक के तौर पर नियुक्त करने और जॉइंट स्टैच्युटरी ऑडिटर्स का कुल पारिश्रमिक तय करने को मंज़ूरी दी गई। (साधारण प्रस्ताव)

विशेष कामकाज:

4.स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ ज़रूरी संबंधित पार्टी ट्रांज़ैक्शन और उनमें बदलाव को मंज़ूरी दी गई। (साधारण प्रस्ताव)

5.सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन के साथ ज़रूरी संबंधित पार्टी ट्रांज़ैक्शन और उनमें बदलाव को मंज़ूरी दी गई। (साधारण प्रस्ताव)

6.पात्र इक्विटी सिक्योरिटीज़ जारी कर फंड जुटाने को मंज़ूरी दी गई (खास प्रस्ताव)

7.पात्र इक्विटी सिक्योरिटीज़ जारी कर फंड जुटाने को मंज़ूरी दी गई (खास प्रस्ताव)

यस बैंक के गैर-कार्यकारी, अंशकालिक चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक, श्री रामा सुब्रमण्यम गांधी ने इस अवसर पर कहा, सम्मानित शेयरधारक, निदेशक मंडल के सदस्य और साथियों, निदेशक मंडल और बैंक के शीर्ष नेतृत्व की ओर से, मुझे यस बैंक की 22वीं सालाना आम बैठक में आपका स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं आपके सामने बैंक के प्रदर्शन का पेश कर रहा हूं, जो संस्थागत प्रगति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण साल रहा है।

वित्त]य वर्ष 2025-26 को उन महत्वपूर्ण बदलावों के लिए याद किया जाएगा जो मज़बूत वित्तीय संस्थान की पहचान हैं यानी गवर्नेंस, पूंजी की मज़बूती, स्टेकहोल्डर का भरोसा और परिचालनात्मक अनुशासन। हमारी निरंतर बढ़ती वृद्धि उन फैसलों का परिणाम है, जो धैर्य के साथ लिए गए, सटीकता से लागू किए गए और इस विश्वास पर आधारित रहे कि दीर्घकालिक मूल्य निर्माण की बुनियाद भरोसा ही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने समीक्षाधीन साल के दौरान 7.7% की मज़बूत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर हासिल की, जिसे निजी खपत में तेज़ी, अनुकूल मौद्रिक स्थितियों और ढांचागत नीतिगत समर्थन से मदद मिली। आरबीआई ने नीति को उदार रखने की प्रक्रिया अपनाई, जिसके तहत फरवरी 2025 से नीतिगत रेपो रेट को कुल मिलाकर 125 आधार अंक घटाकर 5.25% कर दिया गया और साथ ही तरलता भी बढ़ाई गई।

इस नीतिगत समर्थन से से ग्राहकों की मज़बूत मांग, क्रेडिट का बेहतर माहौल और निजी पूंजी व्यय में तेज़ी आई। देश के भीतर इस मज़बूती के बावजूद, वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण बना रहा; पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, भू-राजनीतक बंटवारे और व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितताओं का वृद्धि पर असर हुआ। आईएमएफ का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक वृद्धि धीमी होकर 3.1% रह जाएगी। आगे देखें तो, भारत सबसे तेज़ी से वृद्धि दर्ज करने वाली विशाल अर्थव्यवस्था बना हुआ है, साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान ज़ाहिर किया है, जिससे स्पष्ट है कि बैंक के निरंतर विस्तार के लिए माहौल अनुकूल रहेगा।

यस बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3,476 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पुनर्गठन के बाद से इसकी सबसे अधिक सालाना मुनाफे वाली स्थिति है। यह वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 44.5% की वृद्धि दिखाता है – जो अनुशासित काम और रणनीतिक स्पष्टता का सीधा परिणाम है। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 1.0% के सालाना रिटर्न ऑन एसेट्स (आरओए) दर्ज किया, जबकि पूरे साल का आरओए वित्त वर्ष 2024-25 के 0.6% से बढ़कर 0.8% हो गया।

कुल जमा (डिपॉज़िट) ₹3 लाख करोड़ के उल्लेखनीय आंकड़े को पार कर गया, जिसमें खुदरा और शाखा बैंकिंग जमा का योगदान 58.4% रहा और इनमें साल-दर-साल के आधार पर 13.5% की वृद्धि हुई, जो उद्योग (10.2%) और निजी क्षेत्र के बैंक (11.4%) दोनों से अधिक है। कासा बैलेंस ₹1 लाख करोड़ के उल्लेखनीय स्तर को पार कर गया।

बैंक का अग्रिम खाता (एडवांसेज़ बुक) बढ़कर ₹273,445 करोड़ हो गया, जिसमें साल-दर-साल के आधार पर 11.1% की वृद्धि दर्ज हुई, जिसकी वजह थी हर खंड में मज़बूत वितरण रुझान। बॉरोइंग साल-दर-साल 9.4% घटकर ₹64,864 करोड़ रह गई, जिसमें आरआईडीएफ से जुड़े बैलेंस में लगातार कमी का योगदान रहा, क्योंकि बैंक ने सभी महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाले खंडों को ऋण वितरण(पीएएल) उप-खंड में एक और साल ‘निल शॉर्टफॉल’ (कोई कमी न होना) हासिल किया।

परिसंपत्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) में लगातार सुधार हुआ, जिसमें सकल एनपीए सुधरकर 1.3% हो गया और शुद्ध एनपीए घटकर 0.2% रह गया, जो उद्योग में सबसे निचले स्तरों में से एक है। जमा की लागत में कमी और अधिक लागत वाली बॉरोइंग को कम करने की वजह से शुद्ध ब्याज मार्जिन बढ़कर 2.6% हो गया। बैंक की पूंजीगत स्थिति मज़बूत बनी हुई है, जिसमें पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) 15.3% है, जो नियामकीय अनिवार्यता के मुकाबले काफी अधिक है।

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